November 30, 2022

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Noida Authority News नोएडा प्राधिकरण में 4.2 किलोमीटर नाला सफाई के लिए करीब 15 लाख का टेंडर जारी किया है लेकिन 13 किलोमीटर के लिए प्राधिकरण सिंचाई विभाग को 6.66 करोड़ का भुगतान सिर्फ नाले की सिल्ट निकालने के लिए कर रहा है।

नोएडा [कुंदन तिवारी]। सुप्रीम कोर्ट ने यूं ही टिप्पणी नहीं की है। नोएडा प्राधिकरण के मुंह, नाक, कान से भ्रष्टाचार टपकता है। यहां पर तैनात अधिकारी-कर्मचारी समय समय पर चरितार्थ करके दिखा भी रहे है। ताजा मामला कोंडली नाला सफाई को लेकर प्रकाश में आया है।
इसमें 17.2 किलोमीटर लंबे कोंडली नाले के लिए दो टेंडर जारी होने का दावा किया गया है, जबकि 4.2 किलोमीटर के लिए नोएडा प्राधिकरण ने 15 लाख रुपये का टेंडर निकाला था, पर उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग 13 किलोमीटर लंबे नाले के जो प्राधिकरण से 6.66 करोड़ का भुगतान ले रहा है, उसके टेंडर का अता-पता तक नहीं है। प्रकाशन तक नहीं कराया गया है।

कागजी दस्तावेजों को स्कैन कर घोटाले को दिया गया अंजाम
फर्जी तरीके से कागजी दस्तावेजों को स्कैन कर घोटाले को अंजाम दिया गया है। अब शिकायत शासन स्तर पहुंचने के बाद घोटाले की जांच शुरू होने जा रही है। नोएडा प्राधिकरण जन स्वास्थ्य विभाग द्वितीय का प्रभार देख रहे वरिष्ठ प्रबंधक आरके शर्मा ने बताया कि सिंचाई विभाग की ओर से जारी बिल पर ही भुगतान प्राधिकरण करता है। अन्य प्रक्रिया से प्राधिकरण का लेना देना नहीं है।

नाला सफाई एक वर्ष छोड़ कर प्राधिकरण करवाता है। उनकी इसी बात ने घोटाले की बात को और मजबूती दे दी है, क्योंकि नोएडा प्राधिकरण ने पिछले वर्ष से लगातार कोंडली नाला सफाई के नाम पर करोड़ों का भुगतान सिंचाई विभाग को कर रहा है। पिछले वर्ष पांच करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
वर्षों से खेला जा रहा है यह खेल
सूत्रों का कहना है कि शासन को भेजी शिकायत में स्पष्ट किया गया है कि उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिकारियों की ओर से नोएडा प्राधिकरण जन स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर लाखों का टेंडर करोड़ों में कराया जाता है। यह खेल वर्षों से खेला जा रहा है।

इस बार भी उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने टेंडर नोटिस संख्या 5, 6, 7 को जारी किया, लेकिन प्रकाशन नहीं कराया। पूर्व की भांति चहेतों को काम सौंप दिया गया। प्राधिकरण से भुगतान के लिए 6.66 करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार किया गया है। जिस पर दोनों विभागों की ओर से घोटाला कर बंदरबांट होना है। यही शिकायत शासन स्तर पर की गई है।
बता दें कि कोंडली नाला 17.2 किलोमीटर का है, जो नोएडा में सेक्टर-11 से प्रवेश करता हुआ, सेक्टर-168 होते हुए यमुना में गिरता है। 4.2 किलोमीटर सेक्टर-11 से सेक्टर-34 तक नाले का हिस्सा नोएडा प्राधिकरण के पास है। जबकि 13 किलोमीटर का नाला सेक्टर-51 से लेकर यमुना तक उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधीन आता है।

प्राधिकरण में 4.2 किलोमीटर नाला सफाई के लिए करीब 15 लाख का टेंडर जारी किया है, लेकिन 13 किलोमीटर के लिए प्राधिकरण सिंचाई विभाग को 6.66 करोड़ का भुगतान सिर्फ नाले की सिल्ट निकालने के लिए कर रहा है।
अधिकांश आबादी 15 लाख के टेंडर वाले क्षेत्र में आता है। घनी आबादी से गुजरने वाले नाले का टेंडर 15 लाख का और जहां नाला गंदा ही नहीं है, उस 13 किमी का कार्य 50 लाख से ऊपर नहीं होना चाहिए, पर 13 गुना से अधिक अपने आप में सवालों को खड़ा करता है।

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