October 4, 2022

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नई दिल्ली. वॉट्सऐप, जूम और गूगल डुओ जैसी कंपनियों को अब भारत में काम करने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता पड़ सकती है. दरअसल, भारत सरकार नया टेलीकॉम बिल लेकर आ रही है. इसके तहत वॉट्सऐप, जूम और गूगल डुओ जैसे ओवर-द-टॉप प्लेयर्स जो कॉलिंग और मैसेजिंग सर्विस प्रदान करते हैं, उन्हें देश में काम करने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता हो सकती है.
बिल में ओटीटी को टेलीकॉम सर्विस के साथ शामिल किया गया है. सरकार ने बिल में टेलीकॉम और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स की फीस और पेनल्टी माफ करने का प्रावधान प्रस्तावित किया है. इसके अलावा मंत्रालय ने किसी टेलीकॉम या इंटरनेट प्रोवाइडर कंपनी द्वारा अपना लाइसेंस सरेंडर करने पर फीस रिफंड करने का प्रावधान भी पेश किया है.
इनोवेशन को बढ़ावा
टेलीकॉम मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को कहा कि नया टेलीकॉम बिल इंडस्ट्री को पुनर्गठन और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए एक रोडमैप प्रदान करेगा. पब्लिक अफेयर्स फोरम ऑफ इंडिया के एक कार्यक्रम में बोलते हुए मंत्री ने कहा कि अगले डेढ़ दो साल में सरकार को पूरे डिजिटल रेगूलेटरी फ्रेमवर्क को पूरी तरह से संशोधित करेगी.
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वैश्विक स्तर का डिजिटल लीगल फ्रेमवर्क 
उन्होंने कहा कि इसका मकसद सामाजिक उद्देश्य, लोगों के कर्तव्य और अधिकार और टेक्नोलॉजी फ्रेमवर्क के बीच बैलेंस बनाना है. अश्विनी वैष्णव ने आगे कहा कि डिजिटल दुनिया को व्यापक कानूनों की जरूरत है और प्रधानमंत्री ने टेलीकॉम मंत्रालय को टारगेट दिया है कि वह भारत के डिजिटल लीगल फ्रेमवर्क को वैश्विक स्तर का बनाए.
इंडस्ट्री का पुनर्गठन
टेलीकॉम मंत्री ने कहा कि बिजनेस एन्वाइरन्मन्ट, टेक्नोलॉजी में बदलाव और कई अन्य फैक्टर्स के कारण इंडस्ट्री को कई चरणों से गुजरना पड़ता है. इसलिए उसे पुनर्गठन की जरूरत होती है. मंत्री ने आगे कहा कि अगर इंडस्ट्री का पुनर्गठन करना है तो हमें इन बातों का ध्यान रखना होगा कि ये चीजें मेरा अधिकार हैं और इसलिए इस बिल में एक स्पष्ट फ्रेम सामने रखा गया है.

बेस्ट डिजिटल लीगल फ्रेमवर्क बनाएंगे
वैष्णव ने कहा, ‘इसका मतलब यह नहीं है कि हम बस घूमते रहें और दुनिया में जो भी बेस्ट है उसकी कॉपी कर लें, बल्कि इसका टारगेट एक ऐसा डिजिटल लीगल फ्रेमवर्क तैयार करना है जिसका पूरी दुनिया अध्ययन करे. यह एक बहुत बड़ा उद्देश्य है और यह संभव है.’वैष्णव ने कहा कि अगले 25 साल शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सामाजिक बुनियादी ढांचे में निर्माण, इनोवेशन, नियमों के सरलीकरण और सुधारों पर ध्यान दिया जाएगा.
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